भारत का इतिहास

शनिवार, अक्तूबर 17, 2015

भारत

भारत [सम्पूर्ण प्रभुतासंपन्न समाजवादी धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक गणराज्य भारत। (अंग्रेज़ीIndia)] दुनिया की सबसे पुरानी सभ्‍यताओं में से एक है, जो 4,000 से अधिक वर्षों से चली आ रही है और जिसने अनेक रीति-रिवाज़ों और परम्‍पराओं का संगम देखा है। यह देश की समृद्ध संस्‍कृति और विरासत का परिचायक है। आज़ादी के बाद 68 वर्षों में भारत ने सामाजिक और आर्थिक प्रगति की है। भारतकृषि में आत्‍मनिर्भर देश है और औद्योगीकरण में भी विश्व के चुने हुए देशों में भी इसकी गिनती की जाती है। यह उन देशों में से एक है, जो चाँद पर पहुँच चुके हैं और परमाणु शक्ति संपन्न हैं।
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इतिहास

भारत में मानवीय कार्यकलाप के जो प्राचीनतम चिह्न अब तक मिले हैं, वे 4,00,000 ई. पू. और 2,00,000 ई. पू. के बीच दूसरे और तीसरे हिम-युगों के संधिकाल के हैं और वे इस बात के साक्ष्य प्रस्तुत करते हैं कि उस समय पत्थर के उपकरण काम में लाए जाते थे। इसके पश्चात् एक लम्बे अरसे तक विकास मन्द गति से होता रहा, जिसमें अन्तिम समय में जाकर तीव्रता आई और उसकी परिणति 2300 ई. पू. के लगभग सिन्धु घाटी की आलीशान सभ्यता (अथवा नवीनतम नामकरण के अनुसार हड़प्पा संस्कृति) के रूप में हुई।हड़प्पा की पूर्ववर्ती संस्कृतियाँ हैं: बलूचिस्तानी पहाड़ियों के गाँवों की कुल्ली संस्कृति और राजस्थान तथा पंजाब की नदियों के किनारे बसे कुछ ग्राम-समुदायों की संस्कृति।[5]

भौतिक विशेषताएँ

मुख्‍य भूभाग में चार क्षेत्र हैं, नामत: महापर्वत क्षेत्र, गंगा और सिंधु नदी के मैदानी क्षेत्र और मरूस्‍थली क्षेत्र और दक्षिणी प्रायद्वीप।
हिमालय की तीन शृंखलाएँ हैं, जो लगभग समानांतर फैली हुई हैं। इसके बीच बड़े - बड़े पठार और घाटियाँ हैं, इनमें कश्मीर और कुल्‍लू जैसी कुछ घाटियाँ उपजाऊ, विस्‍तृत और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर हैं। संसार की सबसे ऊंची चोटियों में से कुछ इन्‍हीं पर्वत शृंखलाओं में हैं। अधिक ऊंचाई के कारण आना -जाना केवल कुछ ही दर्रों से हो पाता है, जिनमें मुख्‍य हैं -
  • चुंबी घाटी से होते हुए मुख्‍य भारत-तिब्‍बत व्‍यापार मार्ग पर जेलप ला और नाथू-ला दर्रे
  • उत्तर-पूर्व दार्जिलिंग
  • कल्‍पना (किन्‍नौर) के उत्तर - पूर्व में सतलुज घाटी में शिपकी ला दर्रा

भूगर्भीय संरचना

भारत के भू‍वैज्ञानिक क्षेत्र व्‍यापक रुप से भौतिक विशेषताओं का पालन करते हैं और इन्‍हें मुख्यत: तीन क्षेत्रों के समूह में रखा जा सकता है:
  1. हिमालय पर्वत शृंखला और उनके संबद्ध पर्वत समूह।
  2. भारत-गंगा मैदान क्षेत्र।
  3. प्रायद्वीपीय क्षेत्र

भारत का संविधान

भारत का संविधान 26 जनवरी, 1950 को लागू हुआ। इसका निर्माण संविधान सभा ने किया था, जिसकी पहली बैठक 9 दिसम्बर, 1946 को हुई थी। संविधान सभा ने 26 नवम्बर, 1949 को संविधान को अंगीकार कर लिया था। संविधान सभा की पहली बैठक अविभाजित भारत के लिए बुलाई गई थी। 4 अगस्त, 1947 को संविधान सभा की बैठक पुनः हुई और उसके अध्यक्ष सच्चिदानन्द सिन्हाथे। सिन्हा के निधन के बाद डॉ. राजेन्द्र प्रसाद संविधान सभा के अध्यक्ष बने। फ़रवरी 1948 में संविधान का मसौदा प्रकाशित हुआ। 26 नवम्बर, 1949 को संविधान अन्तिम रूप में स्वीकृत हुआ और 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ।

धर्म

भारतीय संस्कृति में विभिन्नता उसका भूषण है। यहाँ हिन्दू धर्म के अगणित रूपों और संप्रदायों के अतिरिक्त, बौद्धजैनसिक्ख,इस्लामईसाई, यहूदी आदि धर्मों की विविधता का भी एक सांस्कृतिक समायोजन देखने को मिलता है। हिन्दू धर्म के विविध सम्प्रदाय एवं मत सारे देश में फैले हुए हैं, जैसे वैदिक धर्मशैववैष्णवशाक्त आदि पौराणिक धर्म, राधा-बल्लभ संप्रदाय, श्री संप्रदाय, आर्य समाज, समाज आदि। परन्तु इन सभी मतवादों में सनातन धर्म की एकरसता खण्डित न होकर विविध रूपों में गठित होती है। यहाँ के निवासियों में भाषा की विविधता भी इस देश की मूलभूत सांस्कृतिक एकता के लिए बाधक न होकर साधक प्रतीत होती है।

अर्थव्यवस्था

भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था क्रय शक्ति समानता के आधार पर दुनिया में चौथी सबसे बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था है। यह विशाल जनशक्ति आधार, विविध प्राकृतिक संसाधनों और सशक्‍त वृहत अर्थव्‍यवस्‍था के मूलभूत तत्‍वों के कारण व्‍यवसाय और निवेश के अवसरों के सबसे अधिक आकर्षक गंतव्‍यों में से एक है। वर्ष 1991 में आरंभ की गई आर्थिक सुधारों की प्रक्रिया से सम्‍पूर्ण अर्थव्‍यवस्‍था में फैले नीतिगत ढाँचे के उदारीकरण के माध्‍यम से एक निवेशक अनुकूल परिवेश मिलता रहा है। भारत को आज़ाद हुए 68 साल हो चुके हैं और इस दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था की दशा में ज़बरदस्त बदलाव आया है। औद्योगिक विकास ने अर्थव्यवस्था का रूप बदल दिया है। आज भारत की गिनती दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में होती है। विश्व की अर्थव्यवस्था को चलाने में भारत की भूमिका बढ़ती जा रही है। आईटी सॅक्टर में पूरी दुनिया भारत का लोहा मानती है।

कृषि

कृषि भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है। विभिन्न पंचवर्षीय योजनाओं द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न कार्यक्रमों एवं प्रयासों से कृषि को राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में गरिमापूर्ण दर्जा मिला है। कृषि क्षेत्रों में लगभग 64% श्रमिकों को रोज़गार मिला हुआ है। 1950-51 में कुल घरेलू उत्पाद में कृषि का हिस्सा 59.2% था जो घटकर 1982-83 में 36.4% और 1990-91 में 34.9% तथा 2001-2002 में 25% रह गया। यह 2006-07 की अवधि के दौरान औसत आधार पर घटकर 18.5% रह गया। दसवीं योजना (2002-2007) के दौरान समग्र सकल घरेलू उत्पाद की औसत वार्षिक वृद्धि पद 7.6% थी जबकि इस दौरान कृषि तथा सम्बद्ध क्षेत्र की वार्षिक वृद्धि दर 2.3% रही। 2001-02 से प्रारंभ हुई नव सहस्त्राब्दी के प्रथम 6 वर्षों में 3.0% की वार्षिक सामान्य औसत वृद्धि दर 2003-04 में 10% और 2005-06 में 6% की रही।

खनिज संपदा

स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात भारत में खनिजों के उत्पादन में निरन्तर वृद्धि हुई है। कोयलालौह अयस्कबॉक्साइट आदि का उत्पादन निरंतर बढ़ा है। 1951 में सिर्फ़ 83 करोड़ रुपये के खनिजों का खनन हुआ था, परन्तु 1970-71 में इनकी मात्रा बढ़कर 490 करोड़ रुपये हो गई। अगले 20 वर्षों में खनिजों के उत्पादन में अभूतपूर्व वृद्धि हुई। 2001-02 में निकाले गये खनिजों का कुल मूल्य 58,516.36 करोड़ रुपये तक पहुँच गया जबकि 2005-06 के दौरान कुल 75,121.61 करोड़ रुपये मूल्य के खनिजों का उत्पादन किया गया। यदि मात्रा की दृष्टि से देखा जाये, तो भारत में खनिजों की मात्रा में लगभग तिगुनी वृद्धि हुई है, उसका 50% भाग सिर्फ़पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस के कारण तथा 40% कोयला के कारण हुआ है।

रक्षा

भारत की रक्षा नीति का प्रमुख उद्देश्य यह है कि भारतीय उपमहाद्वीप में उसे बढ़ावा दिया जाए एवं स्थायित्व प्रदान किया जाए तथा देश की रक्षा सेनाओं को पर्याप्त रूप से सुसज्जित किया जाए, ताकि वे किसी भी आक्रमण से देश की रक्षा कर सकें। वर्ष 1946 के पूर्व भारतीय रक्षा का पूरा नियंत्रण अंग्रेज़ों के हाथों में था। उसी वर्ष केंद्र में अंतरिम सरकार में पहली बार एक भारतीय देश के रक्षा मंत्री बलदेव सिंह बने। हालांकि कमांडर-इन-चीफ एक अंग्रेज़ ही रहा । 1947 में देश का विभाजन होने पर भारत को 45 रेजीमेंटें मिलीं, जिनमें 2.5 लाख सैनिक थे। शेष रेजीमेंट पाकिस्तान चली गयीं। गोरखा फ़ौज की 6 रेजीमेंटं (लगभग 25,000 सैनिक) भी भारत को मिलीं। शेष गोरखा सैनिक ब्रिटिश सेना में सम्मिलित हो गये। ब्रिटिश सेना की अंतिम टुकड़ी सामरसैट लाइट इन्फैंट्री की पहली बटालियन हो गयी। ब्रिटिश सेना की अंतिम टुकड़ी सामरसैट लाइट इन्फैंट्री की पहली बटालियन भारतीय भूमि से 28 फ़रवरी, 1948 को स्वदेश रवाना हुई।

पशु पक्षी जगत

आँकड़े एक झलक
क्षेत्रफल32,87,263 वर्ग किमी.[6]
-भूमध्य रेखा से दूरी [7]876 किमी
-पूर्व से पश्चिम लंबाई2,933 किमी
-उत्तर से दक्षिण लंबाई3,214 किमी
-प्रादेशिक जलसीमा की चौड़ाईसमुद्र तट से 12 समुद्री मील तक।
-एकान्तिक आर्थिक क्षेत्रसंलग्न क्षेत्र से आगे 200 समुद्री मील तक।

सीमा7 देश और 2 महासागर[8]
-समुद्री सीमा[9]7516.5 किमी
-प्राकृतिक भाग(1) उत्तर का पर्वतीय प्रदेश (2) उत्तर का विशाल मैदान (3) दक्षिण का प्रायद्वीपीय पठार (4) समुद्र तटीय मैदान तथा (5) थार मरुस्थल
-स्थलीय सीमा[10]15,200 किमी

राज्य28
-संघशासित क्षेत्र[11]7
-ज़िलों की संख्या593
-उपज़िलों की संख्या5,470
-सबसे बड़ा ज़िलालद्दाख (जम्मू-कश्मीर, क्षेत्रफल 82,665 वर्ग किमी.)।
-सबसे छोटा ज़िलाथौबॅल (मणिपुर, क्षेत्रफल- 507 वर्ग किमी.)।
-द्वीपों की कुल संख्या247 [12]
-तटरेखा से लगे राज्यगुजरातमहाराष्ट्रगोवाकर्नाटक,केरलतमिलनाडुआंध्र प्रदेश,उड़ीसा और पश्चिम बंगाल
-केन्द्रशासित प्रदेश (तटरेखा)दमन व दीवदादरा एवं नगर हवेलीलक्षद्वीपपांडिचेरी तथाअंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह
-कर्क रेखा [13]गुजरातराजस्थानमध्यप्रदेश,छत्तीसगढ़झारखंडपश्चिम बंगाल,त्रिपुरा तथा मिज़ोरम
-प्रमुख नगरमुम्बईनई दिल्लीकोलकाता,चेन्नईबेंगलोरहैदराबाद,तिरुअनन्तपुरम, सिकन्दराबाद,कानपुरअहमदाबादजयपुर,जोधपुरअमृतसरचण्‍डीगढ़,श्रीनगरजम्मूशिमला, दिसपुर,इटानगरकोचीनआगरा आदि।
-राजधानीनई दिल्ली
-पर्वतीय पर्यटनअल्मोड़ानैनीताललैन्सडाउन,गढ़मुक्तेश्वरमसूरीकसौली,शिमला, कुल्लू घाटी, डलहौज़ी,श्रीनगरगुलबर्ग, सोनमर्ग, अमरनाथ,पहलगामदार्जिलिंगकालिंपोंग,राँचीशिलांग, कुंजुर, ऊटकमंड (ऊटी), महाबलेश्वरपंचमढ़ी,माउण्ट आबू
-प्रथम श्रेणी के नगरों की संख्या300
-द्वितीय श्रेणी के नगरों की संख्या345
-तृतीय श्रेणी के नगरों की संख्या947
-चतुर्थ श्रेणी के नगरों की संख्या1,167
-पंचम श्रेणी के नगरों की संख्या740
-षष्ठम श्रेणी के नगरों की संख्या197
-कुल नगरों की संख्या5,161
-सर्वाधिक नगरों वाला राज्यउत्तर प्रदेश (704 नगर)
-सबसे कम नगर वाला राज्यमेघालय (7 नगर)
-सर्वाधिक नगरीय जनसंख्या वाला राज्यउत्तर प्रदेश (3,45,39,582),मिज़ोरम (45.10%)
-सबसे कम नगरीय जनसंख्या वाला राज्यसिक्किम (59,870), हिमाचल प्रदेश(8.69%)
-संघशासित क्षेत्र सर्वाधिक जनसंख्या[14]दिल्ली 89.93%
-संघ शासित क्षेत्र कम जनसंख्या [15]दादरा तथा नगर हवेली (8.47%)
-संघशासित क्षेत्र (सबसे बड़ा)[16]अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह(8,293 वर्ग किमी.)
-सबसे छोटा संघ शासित क्षेत्रलक्षद्वीप (32 वर्ग किमी.)
-शहरों की संख्या5,161
-गांवों की संख्या6,38,588
-आबाद गांवों की संख्या5,93,732
-ग़ैर-आबाद गांवों की संख्या44,856
-सामुद्रिक मत्स्ययन का प्रमुख क्षेत्रपश्चिमी तट (75% तथा पूर्वी तट (25%) [17]
-सबसे बड़ा राज्य (क्षेत्रफल)राजस्थान (3,42,239 वर्ग किमी.)
-सबसे छोटा राज्यगोवा (3,702 वर्ग किमी.)

भूगोल
-प्रमुख पर्वतहिमालयकराकोरमशिवालिक,अरावली, पश्चिमी घाट, पूर्वी घाट,विन्ध्याचलसतपुड़ाअन्नामलाई,नीलगिरिपालनी, नल्लामाला,मैकलइलायची
-प्रमुख नदियाँसिन्धुसतलजब्रह्मपुत्रगंगा,यमुनागोदावरीदामोदरनर्मदा,ताप्तीकृष्णाकावेरीमहानदी,घाघरागोमतीरामगंगाचम्बलआदि।
-पर्वत शिखरगाडविन आस्टिन या माउण्ट के 2 (8,611 मी.), कंचनजंघा (8,598 मी.), नंगा पर्वत (8,126 मी.), नंदादेवी (7,717 मी.), कामेत (7,756 मी.), मकालू (8,078 मी.),अन्नपूर्णा (8,078 मी.), मनसालू (8,156 मी.), बद्रीनाथकेदारनाथ, त्रिशूल, माना, गंगोत्री, गुरुशिखर, महेन्द्रगिरि, अनाईमुडी आदि।
-झीलडल, वुलर, नैनीसातताल, नागिन,सांभर, डीडवाना, चिल्काहुसैन सागरवेम्बानद आदि।
-जलवायुमानसूनी
-वनक्षेत्र750 लाख हेक्टेयर [18]
-प्रमुख मिट्टियाँजलोढ़कालीलाल, पीली,लैटेराइटमरुस्थलीय, पर्वतीय,नमकीन एवं पीट तथा दलदली।
-सिंचाई [19]नहरें (40.0%) कुएँ (37.8%), तालाब (14.5%) तथा अन्य (7.7%)।
-कृषि के प्रकारतर खेती [20], आर्द्र खेती [21], झूम कृषि [22] तथा पर्वतीय कृषि [23]
-खाद्यान्न फ़सलेंचावलगेहूँज्वारबाजरा, रागी, जौआदि।
-नक़दी फ़सलेंगन्नाचाय, काफ़ी, रबड़नारियल,फल एवं सब्जियाँदालेंतम्बाकू,कपास तथा तिलहनी फ़सलें।
-खनिज संसाधनलौह अयस्ककोयलामैंगनीज,अभ्रकबॉक्साइट, चूनापत्थर,यूरेनियमसोनाचाँदीहीरा,खनिज तेल आदि।

जनसंख्या1,028,610,328 (2001) [24]
-पुरुष जनसंख्या53,21,56,772
-महिला जनसंख्या49,64,53,556
-अनुसूचित जाति [25]16,66,35,700 (कुल जनसंख्या का 16.2%)
-अनुसूचित जनजाति [26]8,43,26,240 (कुल जनसंख्या का 8.2%)
-प्रमुख जनजातियाँगद्दी, गुज्जर, थारू, भोटिया, मिपुरी, रियाना, लेप्चा, मीणा, भील, गरासिया, कोली, महादेवी, कोंकना, संथाल, मुंडा, उराँव, बैगा, कोया,गोंड आदि।
-विश्व में स्थान (जनसंख्या)दूसरा
-विश्व जनसंख्या का प्रतिशत16.87%
-जनसंख्या घनत्व324 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी
-जनसंख्या वृद्धि दर (दशक)21.54% (1991-2001)
-औसत वृद्धि दर [27]1.95%
-लिंगानुपात ♀/♂933 : 1000
-राज भाषाहिन्दी [28]
-प्रति व्यक्ति आय27,786 रु0 (2007-08)

अर्थव्यवस्था
-निर्यात की वस्तुएँइंजीनियरी उपकरण, मसाले,तम्बाकू, चमड़े का सामान, चाय,लौह अयस्क आदि।
-आयात की वस्तुएँरसायन, मशीनरी, उपकरण, उर्वरक,खनिज तेल आदि।
-व्यापार सहयोगीसंयुक्त राज्य अमेरिकाब्रिटेन, नये राष्ट्रों के राष्ट्रकुल (सी.आई.एस.) के देश, जापानइटली, जर्मनी, पूर्वी यूरोपीय देश।
-राष्ट्रीयकृत बैंकों की संख्या20
-तेलशोधनशालाओं की संख्या13
-कुल उद्यमों की संख्या4,212 करोड़ (कृषि में संलग्न उद्यमों के अतिरिक्त)
-उद्यम (ग्रामीण क्षेत्र)2,581 करोड़ (कृषि में संलग्न उद्यमों के अतिरिक्त)
-उद्यम (शहरी क्षेत्र)1,631 करोड़ (38.7%)।
-कृषि कार्य का प्रतिशत[29]15%
-गैर-कृषि कार्य का प्रतिशत [30]85%
-उद्यम (10 या अधिक कामगार)5.83 लाख [31]
-सर्वाधिक उद्यम (पांच राज्य)तमिलनाडु-4446999 (10.56%),महाराष्ट्र- 4374764 (10.39%),पश्चिम बंगाल- 4285688 (10.17%), आंध्र प्रदेश- 4023411 (9.55%), उत्तर प्रदेश- 4015926 (9.53%)।
-सर्वाधिक उद्यम (केन्द्र शासित)दिल्ली-753795(1.79%),चंडीगढ़- 65906 (0.16%),पाण्डिचेरी-49915 (0.12%)।
-प्रमुख उद्योगलौह-इस्पात, जलयान निर्माण, मोटर वाहन, साइकिल, सूतीवस्त्र, ऊनी वस्त्र, रेशमी वस्त्र, वायुयान, उर्वरक, दवाएं एवं औषधियां, रेलवे इंजन, रेल के डिब्बे, जूटकाग़ज़, चीनी, सीमेण्ट, मत्स्ययन, चमड़ा उद्योग, शीशा, भारी एवं हल्के रासायनिक उद्योग तथा रबड़ उद्योग।
-बड़े बन्दरगाहों की संख्या12 बड़े एवं 139 छोटे बंदरगाह।
-प्रमुख बन्दरगाहमुम्बई, न्हावा शेवा, कलकत्ता, हल्दिया, गोवाकोचीन, कांडला,चेन्नई, न्यू मंगलोर, तूतीकोरिन, विशाखापटनम, मझगाँव, अलेप्पी, भटकल, भावनगर, कालीकट, काकीनाडा, कुडलूर, धनुषकोडि, पाराद्वीप, गोपालपुर।
-पश्चिमी तट प्रमुख बंदरगाहकांडला, मुंबई, मार्मुगाओं, न्यू मंगलौर, कोचीन और जवाहरलाल नेहरू
-पूर्वी तट के प्रमुख बंदरगाहतूतीकोरिन, चेन्नईविशाखापत्तनम, पारादीप और कोलकाता- हल्दिया।
-पुराना बंदरगाह (पूर्वी तट)चेन्नई
-सबसे गहरा बंदरगाहविशाखापत्तनम
-कार्यशील व्यक्तियों की संख्या31.5 करोड़, मुख्य श्रमिक- 28.5 करोड़, सीमान्त श्रमिक- 3,0 करोड़
-ताजे जल की मछलियाँसॉ-फिश, लाइवफिश, फैदरबैंक, एंकावी, ईल, बाटा, रेवा, तोर, चिताला, कटला, मिंगाल, मिल्कफिश, कार्प, पर्लशाट आदि।

परिवहन
-जल परिवहनकोलकाता (केन्द्रीय अन्तर्देशीय जल परिवहन निगम का मुख्यालय)
-सड़क मार्ग की कुल लम्बाई33,19,664 किमी.
-राष्ट्रीय राजमार्गों की संख्यासंख्यानुसार 109 जबकि कुल 143 (लगभग 19 निर्माणाधीन)।
-राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल लम्बाई66,590 किमी.
-सबसे लम्बा राष्ट्रीय राजमार्गराजमार्ग संख्या 7 (लंबाई- 2369 किमी वाराणसी से कन्याकुमारी)
-राष्ट्रीय राजमार्ग (स्वर्ण चतुर्भुज)5,846 किमी (योजना के अंतर्गत शामिल राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल लम्बाई)
-राष्ट्रीय राजमार्ग (उत्तर-दक्षिण कॉरिडॉर)7,300 किमी (योजना अंतर्गत शामिल राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल लम्बाई)
-रेलमार्ग63,465 किमी.
-रेलवे परिमण्डलों की संख्या16
-सबसे बड़ा रेलवे परिमण्डलउत्तर रेलवे (11,023 किमी., मुख्यालय- नई दिल्ली)
-रेलवे स्टेशनों की संख्यालगभग 7,133 (31 मार्च, 2006 तक)
-रेल यात्रियों की संख्या50,927 लाख प्रतिदिन (2002-03)
-रेल इंजनों की संख्या</ref>8,025 (मार्च, 2006)।
-रेल सवारी डिब्बों की संख्या42,570 (2001)
-रेल माल डिब्बों की संख्या2,22,147 (2001)
-यात्री रेलगाड़ियों की संख्या44,090
-अन्य सवारी रेल गाड़ियाँ5,990
-अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डों की संख्यापाँच [32]
-मुक्त आकाशीय हवाई अड्डागया (बिहार)
-प्रस्तावित अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डेबंगलौर, हैदराबाद, अहमदाबाद, गोवा, अमृतसर, गुवाहाटी एवं कोचीन।

अन्य
-जीव-जन्तु (अनुमानित)75,000 जिनमें उभयचर- 2,500, सरीसृप- 450, पक्षी- 2,000 तथा स्तनपायी- 850
-राष्ट्रीय उद्यान70
-वन्य प्राणी विहार412
-प्राणी उद्यान35
-राष्ट्रीय प्रतीकराष्ट्रध्वज- तिरंगा
-राजचिन्हसिंहशीर्ष (सारनाथ)
-राष्ट्र गानजन गण मन [33]
-राष्ट्रीय गीतवन्दे मातरम् [34]
-राष्ट्रीय पशुबाघ (पैंथर टाइग्रिस)।
-राष्ट्रीय पक्षीमयूर (पावो क्रिस्टेशस)।
-स्वतन्त्रता दिवस15 अगस्त
-गणतन्त्र दिवस26 जनवरी
वन्य जीवन प्रकृति की अमूल्य देन है। भविष्य में वन्य प्राणियों की समाप्ति की आशंका के कारण भारत में सर्वप्रथम 7 जुलाई, 1955 को वन्य प्राणी दिवस मनाया गया । यह भी निर्णय लिया गया कि प्रत्येक वर्ष दो अक्तूबर से पूरे सप्ताह तक वन्य प्राणी सप्ताह मनाया जाएगा। वर्ष 1956 से वन्य प्राणी सप्ताह मनाया जा रहा है। भारत के संरक्षण कार्यक्रम की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एक मज़बूत संस्थागत ढांचे की रचना की गयी है।

भारतीय भाषा परिवार

भारत की मुख्य विशेषता यह है कि यहाँ विभिन्नता में एकता है। भारत में विभिन्नता का स्वरूप न केवल भौगोलिक है, बल्कि भाषायी तथा सांस्कृतिक भी है। एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में 1652 मातृभाषायें प्रचलन में हैं, जबकि संविधान द्वारा 22 भाषाओं को राजभाषा की मान्यता प्रदान की गयी है। संविधान के अनुच्छेद 344 के अंतर्गत पहले केवल 15 भाषाओं को राजभाषा की मान्यता दी गयी थी, लेकिन 21वें संविधान संशोधन के द्वारा सिन्धी को तथा 71वाँ संविधान संशोधन द्वारा नेपालीकोंकणी तथा मणिपुरी को भी राजभाषा का दर्जा प्रदान किया गया। बाद में 92वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 2003 के द्वारा संविधान की आठवीं अनुसूची में चार नई भाषाओं बोडोडोगरीमैथिली तथा संथाली को राजभाषा में शामिल कर लिया गया। इस प्रकार अब संविधान में 22 भाषाओं को राजभाषा का दर्जा प्रदान किया गया है।

शिक्षा

1911 में भारतीय जनगणना के समय साक्षरता को परिभाषित करते हुए कहा गया है कि "एक पत्र पढ़-लिखकर उसका उत्तर दे देने की योग्यता" साक्षरता है। भारत में लम्बे समय से लिखित भाषा का अस्तित्व है, किन्तु प्रत्यक्ष सूचना के अभाव के कारण इसका संतोषजनक विकास नहीं हुआ। हड़प्पा और मोहनजोदड़ो की लेखन चित्रलिपि तीन हज़ार वर्ष ईसा पूर्व और बाद की है। यद्यपि अभी तक इस लिपि को पढ़ा नहीं जा सका है, तथापि इससे यह स्पष्ट है कि भारतीयों के पास कई शताब्दियों पहले से ही एक लिखित भाषा थी और यहाँ के लोग पढ़ और लिख सकते थे। हड़प्पा और अशोक के काल के बीच में पन्द्रह सौ वर्षों का ऐसा समय रहा है, जिसमें की कोई लिखित प्रमाण नहीं मिलता। लेकिन पाणिनि ने उस समय भारतीयों के द्वारा बोली जाने वाली विभिन्न भाषाओं का उल्लेख किया है।

भारतीय कला

भारतीय कला अपनी प्राचीनता तथा विविधता के लिए विख्यात रही है। आज जिस रूप में 'कला' शब्द अत्यन्त व्यापक और बहुअर्थी हो गया है, प्राचीन काल में उसका एक छोटा हिस्सा भी न था। यदि ऐतिहासिक काल को छोड़ और पीछे प्रागैतिहासिक काल पर दृष्टि डाली जाए तो विभिन्न नदियों की घाटियों में पुरातत्त्वविदों को खुदाई में मिले असंख्य पाषाण उपकरण भारत के आदि मनुष्यों की कलात्मक प्रवृत्तियों के साक्षात प्रमाण हैं। पत्थर के टुकड़े को विभिन्न तकनीकों से विभिन्न प्रयोजनों के अनुरूप स्वरूप प्रदान किया जाता था।

भारतीय संगीत

संगीत मानवीय लय एवं तालबद्ध अभिव्यक्ति है। भारतीय संगीत अपनी मधुरता, लयबद्धता तथा विविधता के लिए जाना जाता है। वर्तमान भारतीय संगीत का जो रूप दृष्टिगत होता है, वह आधुनिक युग की प्रस्तुति नहीं है, बल्कि यह भारतीय इतिहास के प्रासम्भ के साथ ही जुड़ा हुआ है। वैदिक काल में ही भारतीय संगीत के बीज पड़ चुके थे। सामवेद उन वैदिक ॠचाओं का संग्रह मात्र है, जो गेय हैं। प्राचीन काल से ही ईश्वर आराधना हेतु भजनों के प्रयोग की परम्परा रही है। यहाँ तक की यज्ञादि के अवसर पर भी समूहगान होते थे।

नृत्य कला

भारत में नृत्य की अनेक शैलियाँ हैं। भरतनाट्यमओडिसीकुचिपुड़ीकथकलीमणिपुरीकथक आदि परंपरागत नृत्य शैलियाँ हैं तो भंगड़ागिद्दा, नगा, बिहू आदि लोक प्रचलित नृत्य है। ये नृत्य शैलियाँ पूरे देश में विख्यात है। गुजरात का गरबा हरियाणा में भी मंचो की शोभा को बढ़ाता है और पंजाब का भंगड़ा दक्षिण भारत में भी बड़े शौक़ से देखा जाता है। भारत के संगीत को विकसित करने में अमीर ख़ुसरोतानसेनबैजू बावरा जैसे संगीतकारों का विशेष योगदान रहा है। आज भारत के संगीत-क्षितिज पर बिस्मिल्ला ख़ाँ‎ज़ाकिर हुसैनरवि शंकर समान रूप से सम्मानित हैं।

संस्कृति

त्योहार और मेले भारतीय संस्कृति के अभिन्न अंग हैं। यह भी कह सकते हैं कि भारतीय संस्कृति अपने हृदय के माधुर्य को त्योहार और मेलों में व्यक्त करती है, तो अधिक सार्थक होगा। भारतीय संस्कृति प्रेम, सौहार्द्र, करुणा, मैत्री, दया और उदारता जैसे मानवीय गुणों से परिपूर्ण है। यह उल्लास, उत्साह और विकास को एक साथ समेटे हुए है। आनन्द और माधुर्य तो जैसे इसके प्राण हैं। यहाँ हर कार्य आनन्द के साथ शुरू होता है और माधुर्य के साथ सम्पन्न होता है। भारत जैसे विशाल धर्मप्राण देश में आस्था और विश्वास के साथ मिल कर यही आनन्द और उल्लास त्योहार और मेलों में फूट पड़ता है। त्योहार और मेले हमारी धार्मिक आस्थाओं, सामाजिक परम्पराओं और आर्थिक आवश्यकताओं की त्रिवेणी है, जिनमें समूचा जनमानस भावविभोर होकर गोते लगाता है।

भारतीय भोजन

भारतीय भोजन स्वाद और सुगंध का मधुर संगम है। पूरन पूरी हो या दाल बाटी, तंदूरी रोटी हो या शाही पुलाव, पंजाबी भोजन हो या मारवाड़ी भोजन, ज़िक्र चाहे जिस किसी का भी हो रहा हो, केवल नाम सुनने से ही भूख जाग उठती है। भारत में पकवानों की विविधता भी बहुत अधिक है। राजस्थान में दाल-बाटी, कोलकाता में चावल-मछली, पंजाब में रोटी-साग, दक्षिण में इडली-डोसा। इतनी विविधता के बीच एकता का प्रमाण यह है कि आज दक्षिण भारत के लोग दाल-रोटी उसी शौक़ से खाते हैं, जितने शौक़ से उत्तर भारतीय इडली-डोसा खाते हैं। सचमुच भारत एक रंगबिरंगा गुलदस्ता है।

पर्यटन

भारतवासी अपनी दीर्घकालीन, अनवरत एवं सतरंगी उपलब्धियों से युक्त इतिहास पर गर्व कर सकते हैं। प्राचीन काल से ही भारत एक अत्यन्त ही विविधता सम्पन्न देश रहा है और यह विशेषता आज भी समय की घड़ी पर अंकित है। यहाँ प्रारम्भ से अनेक अध्यावसायों का अनुसरण होता रहा है, पृथक्-पृथक् मान्यताएँ हैं, लोगों के रिवाज और दृष्टिकोणों के विभिन्न रंगों से सज़ा यह देश अतीत को भूत, वर्तमान एवं भविष्य की आँखों से देखने के लिए आह्वान कर रहा है। किन्तु बहुरंगी सभ्यता एवं संस्कृति वाले देश के सभी आयामों को समझने का प्रयास इतना आसान नहीं है।
ध्यान दें विस्तार में पढ़ने के लिए देखें:भारत आलेख

राज्य संरचना


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